shaadi….

Okk, So this one I wrote some time back in my diary.  Unfortunately I forgot my diary in an Auto rickshaw one day   😦 So here’s incomplete something of whatever I could recollect from where ever …..

किसी ने मुझसे पूछा की मैने शादी क्यूँ नही की,
मैने कहा मेरी ही ग़लती थी |
एक सीधे सादे लड़के से मिली थी,पर मैं खूबसूरत नही थी,
मेरी ही ग़लती थी |
एक ग़रीब लड़के से मिली थी, पर में दौलतमंद नही थी
मेरी ही ग़लती थी |
एक बेचारे के पास गाड़ी नही थी, मैं कार दे नही सकती थी,
मेरी ही ग़लती थी |
एक को नौकरानी चाहिए थी, जैसे मेरी तो कोई इच्छा ही नही थी
मेरी ही ग़लती थी |

कभी सोचती हूँ की किसी से भी शादी कर लेती क्यूंकी तन्हाई के संग ज़िंदगी नही कटती
मेरी ही ग़लती थी |
फिर सोचती हूँ अच्छा हुआ की मेरी शादी ऩही हुई,
कब तक खुद से बेवफ़ाई करती,
मेरी कोई नही ग़लती |

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