kuch paak roohein

कुछ पाक रूहें
बस कुछ पल के लिए ही धरती पर आती हैं
खुशियाँ बाँटती है और ता-उम्र का गम दे जाती है,
दिल तड़प्ता है उनसे मिलने को
वो बीतें लम्हे फिर से जीने को
वो चेहरा आँखों में भरने को
दिल तड़प्ता है उनसे एक बार गले लगने को
वो संग बीता हुआ आख़िरी लम्हा याद आता है
कुछ और वक़्त मिल जाता, हर वक़्त खुद से यही गिला होता है
जिसकी कभी तुतलाती ज़बान को सुना था,
जिसके कभी लड़खड़ते कदमो को देखा था,
उन कदमो को दूर तलक दौड़ते भी देखा था
वो तुतलाती ज़ुबान से सुरीले सुरो को सुना था,
उसके सिर पेर बँधा सेहरा ना देख सकी,
हर ख्वाब,हर ख्वाइश चूर चूर हो गयी,
फिर से टूटे ख्वाब,जुदाई का गम आँखों की किरकिरी बन गयी.
क्युकि वो रूह अब खामोश हो गयी है,
वो कदम अब थम गये है
तभी कुछ लोग उसे अपने कंधो पेर ले गये हैं
उसने अपना घर कहीं और बसा लिया है
मेरे घर के एक कोने में अब बस उसकी यादें रहती हैं

 

Dedicated to my cousin who lost his life in a ROAD accident.

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